नील स्वर्ग

नील स्वर्ग
प्रकृति हर रंग में खूबसूरत होती है , हरी, पीली , लाल या फिर नीली

Saturday, July 7, 2012

सस्ती रोटी

भूख के समय पेट रोटी की गुहार करता है . और फिर ऐसी जगह जहाँ आप किसी अपने को हस्पताल में रख कर उसका इलाज करवा रहें हो , तो घर की रोटियां वहां कहाँ ? ऐसे में जो भी हस्पताल के बहार खाने को मिल जाता है उसे इंसान खाने को मजबूर होता है .


लेकिन रांची के राजेंद्र मेडिकल कॉलेज और हस्पताल में आने वाले लोगों के लिए बहुत बढ़िया साधन है - सस्ती रोटी का स्टाल ! सिर्फ दस रुपैये में 7 गरमागरम चपातियाँ , साथ में पेट भर आलू की मजेदार  सब्जी और फिर स्वच्छ बोतलबंद मिनरल वाटर की बोतल मात्र 6 रुपैये में . मरीज की खिचड़ी फोयल पेपर में पैक - सिर्फ 6 रुपैये में . 






मैं को हवाई बातें नहीं कर रहा . मेरी पिछली रांची यात्रा में मैं स्वयं देख कर आया इस समाज सेवा के प्रकल्प को . हस्पताल ने एक छोटा सा शेड दे दिया - जहाँ 4-5 महिलाएं बैठ कर रोटियां सकती रहती हैं . सब्जी बहुत बड़ी मात्र में दोनों समय बना कर रख दी जाती है . रोटी के काउंटर पर एक व्यक्ति हर समय तत्परता से रोटियां परोसने को खड़ा रहता है . 




ये सेवा उपलब्ध करवाने का श्रेय है श्री शत्रुघ्न लाल और श्रीमती सुशीला देवी गुप्ता को . उन्होंने न केवल ये प्रकल्प अपने प्रयासों से शुरू किया , बल्कि घाटा होता है , उसे वो अपना सौभाग्य समझ कर अनुदान के रूप में देते हैं . सिर्फ पैसा देने से कोई योजना नहीं चलती . समय देने वाले भी चाहिए . दोनों पति पत्नी नियम पूर्वक वहां का एक चक्कर लगाते हैं , खुद सारी  व्यवस्था को देखते  हैं . रोज दोनों समय सैंकड़ों भूखे व्यक्ति वहां तृप्त होकर जाते हैं . 





ये देश सर्कार के भरोसे नहीं चल रहा . ये चल रहा है - ऐसे सेवा भावी गुप्ता दम्पति जैसे लोगों के भरोसे।.  

5 comments:

  1. सचमुच वन्दनीय हैं ऐसे लोग और उनका संकल्प! इस जानकारी के लिये आपका धन्यवाद!

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  2. यह शेयर करने के लिए आपका आभार |

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  3. नमन ऐसे महापुरुष को.

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  4. प्रशंसनीय कदम नमन ऐसे निःस्वार्थ भाव से सेवा करने वालों को |

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  5. सेवा भाव स्तुत्य है।

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