नील स्वर्ग

नील स्वर्ग
प्रकृति हर रंग में खूबसूरत होती है , हरी, पीली , लाल या फिर नीली

Wednesday, October 12, 2016

खेल ख़त्म पैसा हजम !

  1. लो जी हमने कल फूंक दिए देश के सारे रावण ! कोई भी नहीं बचा। खेल ख़त्म पैसा हजम ! किसे भुलावा देते हैं हर साल ? जिसे जलाते हैं , वो तो सिर्फ एक पुतला था , जिसे बनाकर किसी गरीब के घर का चूल्हा जला होगा। सड़कों पर बाजार लगते हैं रावण के पुतलों के। छोटा रावण , बड़ा रावण , मूंछ वाला रावण , दस सर वाला रावण ! रावण जितना बड़ा - पैसे उतने ज्यादा। छोटे बच्चे , बूढी औरतें , सभी मिलकर बनाते हैं वो बेंत और कागज वाले रावण। भरण पोषण होता है उनके परिवारों का । ऐसे रावणों को मैं क्यों बुरा कहूँ , जो स्वयं जल कर भी गरीब को रोटी देते हैं।                                       
  2. उन रावणों को कौन जलाएगा , जो निर्भया जैसी मासूम बच्चियों का बलात्कार करते हैं ! उन पुलिस के वेश में बैठे जल्लादों को कौन जलाएगा जो गरीब आदमी को फंसा कर थाने में मार डालते हैं। शहाबुद्दीन जैसे खूंखार हत्यारों को जो बेल पर छुड़ा लेते हैं - उनको कौन जलाएगा ? नगर नगर में रावणों की भरमार है ; लेकिन उनके वध के लिए कोई विजयादशमी नहीं आती।

Wednesday, October 5, 2016

देश की प्रतिक्रिया



देश की प्रतिक्रिया

उरी हमले के बाद पाकिस्तान सोशल मिडिया में छाया हुआ है। ब्रह्मपुत्र के जल की धारा में रुकावट डालने से चीन ने अपना खुला समर्थन पाकिस्तान को दे दिया। तब से लगातार ऐसे सन्देश और संवाद व्हाट्सप्प , ट्विटर और फेसबुक पर घूम रहें हैं , की भारत के लोगों को इन दोनों देशों से व्यापारिक या अन्य किसी प्रकार का रिश्ता नहीं रखना चाहिए। यहाँ तक की दिवाली की खरीददारी में चीनी माल का बहिष्कार करना चाहिए।
इस तरह के संवाद देने वाले तो बहुत है , लेकिन इन पर अमल करने वाले ज्यादातर लोग शांत हैं। मेरे एक मित्र सुशील पोद्दार ने उत्तर दिया कि पिछले कई महीनों की खोजबीन और मोलभाव के बाद उन्होंने एक चीनी कंपनी से अपनी फैक्ट्री के लिए कुछ मशीने खरीदने का निर्णय लिया हुआ था ; लेकिन उरी के बाद के घटनाक्रम ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने चीन से मशीन  खरीदने का अपना निर्णय बदल दिया। अब उन्हें नए सिरे से किसी और देश के साथ मोलभाव करना है , और ऊंचे दाम देकर वो मशीन लेनी है। मेरे एक अन्य मित्र श्रवण सुरेका ने भी लिखा की उनकी एक व्यापारिक डील करोड़ों रुपये की एक चीनी कंपनी से तय हो चुकी थी ; लेकिन उन्होंने अपनी डील कैंसिल कर दी।

सुशील पोद्दार और श्रवण सुरेका के निर्णय की किसी ने चाहे वाहवाही नहीं की हो , लेकिन ये लोग हमारे देश के असली देशभक्त हीरो हैं  ; मैं इन्हें सैलूट करता हूँ।
दूसरी तरफ हमारे सामने हैं उदहारण स्वरुप करण  जोहर जो पाकिस्तान की और इसके निंदनीय कलाकारों की वकालत इसलिए कर रहें हैं , क्योंकि उनकी आगामी फिल्म ' ऐ दिल है मुश्किल ' उन पाकिस्तानी सितारों के साथ है और पाकिस्तान उनका बहुत बड़ा मार्केट है। .उसी तरह सलमान खान भी वक़ालत कर रहें हैं ये कह कर की कलाकार कोई आतंकवादी नहीं होता। इन दोनों से एक प्रश्न है - क्या उरी के शहीदों में से एक नाम तुम्हारे सगे भाई का होता , तो भी क्या यही फ़रमाते !

मुम्बई हमले के पहले क्या उन पाकिस्तानियों ने लोगों से पूछा था की तुम में से कोई कलाकार तो नहीं है न ? और न हीं देश के जांबाज कमांडो ने पुछा था , की वो लड़ाई किसके लिए लड़ रहे थे।  मैं निंदा  करता हूँ - ऐसे स्वार्थी लोगों की जो कला की आड़ में देश से ऊपर अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को महत्व देते हैं।
एक हैं श्रीमान अरविन्द केजरीवाल ! उनका शौक है , मोदी के प्रति दैनिक अपशब्द कहना। सर्जिकल स्ट्राइक से उनकी बोलती बंद हो गयी थी। कई दिन हो गए, चुप बैठे। जब पेट में ज्यादा दर्द हो गया तो टेलीविजन पर आये ; पहले तो मोदी जी को उनकी राजनैतिक इच्छा शक्ति पर सैलूट ठोका और फिर आ गए अपने असली रंग में। कहने लगे की पाकिस्तान हमारे सर्जिकल स्ट्राइक को झूठ बता रहा है , आप उन्हें इसका प्रूफ क्यों नहीं दे देते ! भाई वाह ! पाकिस्तान के प्रचार की वजह तो सर्वविदित थी ; लेकिन आपके विचलित होने की वजह आपका राजनैतिक घटिया चिंतन है।  आपको लगता है , की ये सर्जिकल स्ट्राइक पंजाब के चुनाव में कहीं मोदी जी हीरो न बना दे। मोदी जी तो हीरो हैं जनाब , पंजाब के ही नहीं , देश के ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के। हीरो तो आप भी हैं लेकिन सिर्फ  पाकिस्तानी अखबारों के ! बधाई हो ! दिल्ली सबकुछ देख रही है।

दुसरे महान नेता कांग्रेस से फूटे - श्रीमान संजय निरुपम । उन्हें तो मानो केजरीवाल ने शब्द दे दिए।  आनन फानन में उन्होंने अपनी नापने वाली इंची टेप निकाल ली , मोदी जी का ५६ इंच का सीन नापने के लिए ; कांग्रेस को अपनी जान बचाने  के लिए इस महापुरुष से किनारा करना पड़ा। ऐसे पप्पू ब्रांड नेताओं की कांग्रेस में कमी नहीं।

बोले तो कुछ और भी लेकिन फिर जल्दी जल्दी फैला हुआ रायता समेत लिया। देश की जनता ऐसे राजनीति की आड़ में देशद्रोह करने वालों को कभी माफ़ नहीं करेगी।
अंत में चर्चा एक और व्यक्ति की - मिडिया के महानायक सुभाष चंद्र जी की! उन्होंने खुल कर कहा की उनका  ज़ी टीवी सूत्रधार था पाकिस्तानी सीरिअल्स को जिंदगी नाम के नए चैनल के माध्यम से भारत में लाने का लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए उन्होंने सभी पाकिस्तानी कॉन्ट्रैक्ट कैंसल कर दिए हैं और अब कोई भी पाकिस्तानी कार्यक्रम यहाँ प्रसारित नहीं होगा। आर्थिक हानि तो सुभाष चंद्र की भी हुयी है ; लेकिन उन्होंने कला की दुहाई देकर पाकिस्तानी कार्यक्रमों की वकालत नहीं की  !

और अंत  में एक सन्देश हमारे प्रिय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी को !

आदरणीय मोदीजी ! पूरा देश हर कदम पर आपके साथ है। पाकिस्तान के साथ जैसा सलूक किया जाना उचित है , वैसा करें। चंद  लोगों बकवास इस देश के सवा सौ करोड़ देश वाशियों के सामने नक्कार खाने की तूती मात्र है।  उन्हें अनसुना कीजिये और विजय पथ पर बढिए - चाहे शांति के मार्ग से और चाहे युद्ध के मार्ग से !
शत शत वंदन !

Wednesday, September 14, 2016

Priya Kaun ?

प्रिय कौन ?

कल एक रिश्तेदार की मृत्यु हो गयी।  जब उनके घर पहुंचा , तो देखा की मृत शरीर एक अर्थी पर लेटाया हुआ था। परिवार के पुरुष उस अर्थी के ऊपर कपडा और रस्सी आदि बाँध रहे थे। महिलाएं शोक विह्वल होकर एक तरफ खड़ी थी। मृत व्यक्ति के पुत्र शोकाकुल होकर रो रहे थे।  समाज के लोग तथा रिश्तेदार अंतिम विदा देने के लिए पहुंचे हुए थे।

मृत व्यक्ति के भाई ,चाचा , साले  तथा अन्य रिश्तेदार अर्थी तैयार करते हुए निर्देश दे रहे थे -

' बॉडी के ऊपर पहले सफ़ेद कपडा डालो फिर रस्सी बांधो '

' बॉडी के शरीर पर कोई आभूषण तो नहीं है न ?'

'बॉडी को जरा आगे सरकाओ। '

यानि की जीवन का एक प्रिय व्यक्ति अब सिर्फ एक शरीर था - एक बॉडी ! जो प्रिय था जिसे हम नाम लेकर बुलाते थे वो तो चला ही गया था।

यही है शायद आत्मा का रहस्य। आत्मा ही प्रियजन है , आत्मा ही पिता , पति या भाई है।  शरीर तो एक अस्थायी पहचान है उस आत्मा की।

मन की बहुत सी गुत्थियां सुलझ गयी !


Tuesday, July 26, 2016

कुंठा : फ़िल्मी गानों के माध्यम से

कुंठा जीवन की एक सच्चाई है।  असफलता जन्म देती है , निराशा को और निराशा ह्रदय की कुढ़न बन कर बन जाती है - कुंठा। असफलता के कई कारण हो सकते है - खेल कूद , पढ़ाई , व्यापार या प्यार।  फिल्मों से मिलने
 वाले उदाहरण प्रायः प्रेम की असफलता के कारण ही होते हैं। 

इस गीतों भरी बातचीत में हम देखेंगे कुंठा के बदलते हुए स्वरुप।  जब कोई व्यक्ति अपने प्रिय या प्रिया को अपने आप से दूर करने का प्रयास करते हुए देखता है , तो जिस कुंठा का जन्म होता है , उसे कहते हैं ईर्ष्या ! कुंठित मन चीत्कार कर उठता है - और नहीं बस और नहीं , ग़म के प्याले और नहीं !

और जब वह दुराव जीवन के सबसे बड़े नुक्सान में बदल जाता है ; जब उसकी प्रियतमा किसी और की हो जाती है ; तब कुंठा अपने पूरे प्रचंड स्वरुप में आ जाती है। वो समाज चिंता छोड़ कर सीधे सीधे दोष देता है अपनी प्रियतमा को उसका नाम लेकर - ओ मेरी महुआ  तेरे वादे क्या हुए ?


और फिर वो विदा होती है अपने गाँव से , उस समय उस प्रेमी का ह्रदय टुकड़े टुकड़े हो जाता है। उसे अपने टूटे हुए सपने टूटे हुए फूल से और अपनी मीत आँखों में शूल सी चुभती है !


उसकी कुंठा उसे दीवाना बना देती है। वो गली गली भटकता है - ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं !


थक हार कर रातों को सोने की कोशिश में अपनी तन्हाई में आवाज देता है - कोई लौट दे मेरे बीते हुए हुए दिन !


और कुंठा का अंतिम स्वरुप उभरता है , पूरे समाज और पूरी दुनिया के प्रति आक्रोश के रूप में। वो चीत्कार कर उठता है - जला दो इसे फूंक डालों ये दुनिया , मेरे सामने से हटालो ये दुनिया ; तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया !







Sunday, July 10, 2016

सिंगापुर : पर्यावरण



पर्यावरण की सुरक्षा जीवन के हर काम में निहित होनी चाहिए। एक मजेदार बात ; ख़ास कर हम भारत में रहने वालों के लिए। एक दिन मैंने देखा की हमारी गली में एक मकान के सामने के एक कंक्रीट मिक्सर की गाडी आकर खड़ी थी।  उसका मिक्सर वाला टैंक घूम रहा था।  हमारे देश में इस तरह की गाडी खड़ी होती है किसी निर्माणाधीन ईमारत के पास। मुझे समझ में नहीं आया की ये यहाँ क्या कर रही है !

बाद में जब मैं नीचे गया और उस ईमारत के सामने से गुजरा तो देखा की उसके अहाते में एक मिस्त्री अपने औजार लेकर जमीन की सतह एक हिस्से को ठीक कर रहा था। तब मुझे समझ में आया की इस देश में चाहे कोई छोटी सी मरम्मत ही क्यों न करनी हो , सीमेंट ओर कंक्रीट का गारा खुले में नहीं बनाया जाता है।  ये डिपो से कंक्रीट मिक्सर में डाल कर भेजा जाता है।

अब बताइए , ऐसे देश में कहाँ से किसी प्रकार का प्रदुषण फैलेगा !

Monday, July 4, 2016

सिंगापुर : कुछ और अनुभव


किसी भी देश को महान बनते हैं वहां के नागरिक और वहां का प्रशासन ! सिंगापुर में ये दोनों ही इतने चुस्त हैं की जन जीवन में किसी प्रकार की बुराई नजर ही नहीं आती।

फेरीवाले प्रायः हर देश में पाये जाते हैं। अंग्र्जी में इन्हे हॉकर्स कहते हैं। सस्ते दर पर तैयार भोजन खिलते हैं ये हॉकर्स। प्रायः इनका बनाया हुआ भोजन स्वादिष्ट भी होता है। लेकिन समस्या ये होती है की ये सड़कों पर जहाँ तहाँ अपना डेरा जमा लेते हैं। वहां गंदगी फैलाते हैं। इसके अलावा इनके भोजन की स्वच्छ्ता पर हमेशा प्रश्न खड़ा रहता है। भारत में तो ये दोनों बातें बिल्किल साफ़ नजर आती हैं।

सिंगापुर की सड़कों पर मुझे कोई हॉकर खाने पीने की सामग्री बेचता हुआ नहीं दिखा। मैंने अपनी बेटी पल्लवी से पुछा इसके बारे में। उसने बताया की पहले सिंगापुर में भी हॉकर्स हुआ करते थे ; लेकिन सफाई और स्वच्छ्ता के कारण वहां की सरकार ने कई जगहों पर हॉकर सेंटर बना दिए हैं। ये सेंटर पूरी तरह से व्यवस्थित हैं।  यहाँ बैठने के लिए कुर्सियां और टेबल आदि की व्यवस्था है। सरकार के निरीक्षक निश्चित अवधि पर इन हॉकर्स के स्टाल्स का निरिक्षण करते हैं। उनकी सफाई की अवस्था के अनुरूप उनकी रेटिंग की जाती है और वो रेटिंग वहां सामने एक सर्टिफिकेट की तरह दिखना अनिवार्य होती है।

कितना आसान समाधान ! कौन हॉकर चाहेगा की उसकी रेटिंग ख़राब हो , क्योंकि उसकी दुकान पर आने वाला व्यक्ति रेटिंग देख कर ही खायेगा।

क्या ये छोटी छोटी बातें - जो मुझे आकर्षित करती है , हमारी  सरकार के लोगों को नजर नहीं आती ?