नील स्वर्ग

नील स्वर्ग
प्रकृति हर रंग में खूबसूरत होती है , हरी, पीली , लाल या फिर नीली

Monday, October 20, 2014

जिम्मेवारी - एक लघु कथा

हमेशा की तरह घर पहुँच कर उसने बीवी के हाथ में अपनी महीने भर की पगार रख दी और बोला - ' ये  लो दस हजार  रुपैये !' उसकी पत्नी छूटते ही बोली - ' दस हजार रुपैये ? क्यों ? तुम्हारी पगार तो पंद्रह हजार है ?'

उसने सफाई दी - ' हाँ , है तो पंद्रह ही , लेकिन सुबह माँ का फोन आया , कहने लगी बहुत तंगी है , दवाओं का खर्च बढ़ गया है ; सो मैंने पांच हजार उनको भेज दिए !'

बीवीजी का पारा सातवें आसमान पर चढ़  गया। बिफर कर बोली -' किसी तरह से तुम्हारी पगार में घर का खर्च चला रही हूँ।  इसमें से भी अगर तुम दान पुन में लग जाओगे तो मेरे बस का नहीं ये घर चलाना ! जिस लाड़ले बेटे के पास रहती है वही क्यों नहीं खर्च उठाता ? नहीं उठाता तो फिर ये हमारी जिम्मेवारी कैसे बन गयी ? '

उसने उसी नरमी से कहा - ' ये सच है की वो उसका खर्च नहीं दे रहा , इसी लिए  तो मेरे पास फोन आया था। जहाँ तक जिम्मेवारी का सवाल है , तो दामाद भी बेटे की तरह ही होता है , उस हक़ से उन्होंने फोन किया और उसी हक़ से ये हमारी जिम्मेवारी बनती है। '

बीवी जी को तो काटो तो खून नहीं।  आँखों से झड़ने वाली चिंगारी तरल आंसू बन कर झरने लगी।  कुछ क्षणों के लिए पतिदेव की आँखों में देखा और फिर गिर गयी उनके चरणों में।


Saturday, October 11, 2014

मन की बात

प्रधानमंत्री  मोदी ने कुछ दिनों पहले रेडियो पर  देश के लोगों को सम्बोधित किया। ये सम्बोधन अपने शीर्षक के अनुरूप उनके मन की ही बात थी। इस सम्बोधन में न  कोई राजनीति थी और न ही कोई चुनाव प्रचार।  लेकिन किसी व्यक्ति के  मन  की बात का सम्बन्ध उसकी कार्य शैली से कितना अधिक होता है , ये मैं आपको बताऊंगा। अगर आपने उनके मन की बात नहीं सुनी हो तो सुनिए इस लिंक के द्वारा -

Modi's Man KI Baat

अब मैं आपको बताता हूँ मेरे मन की बात। मोदी का ये प्रसारण था  3 ऑक्टोबर को। इस की एक बात जो मेरे मन को छू गयी वो थी - अपनी शक्ति को पहचाने। उन्होंने स्वामी विवेकानंद की एक कहानी का उल्लेख किया के एक शेरनी का एक बच्चा बिछड़ गया और भेड़ों के एक झुण्ड से मिल गया। उसकी  हरकतें धीरे धीरे भेड़ों जैसी हो   गयी।  फिर जब उसे  एक दूसरा शेर मिला उसने उसे अहसास दिलाया की वो एक शेर है भेड़  नहीं।

उस दिन मोदी की  ये बात एक सामान्य शिक्षा से अधिक  नहीं थी।

कुछ दिन पहले देश की सीमा पर पाकिस्तान ने बिना किसी कारण ही बमबारी शुरू कर दी। निहत्थे निरपराध नागरिक मारे गए। ऐसी घटनाएँ पहले भी होती रही है। लेकिन देश की पूर्व सरकार ऐसी घटनाओं को महत्व नहीं देती रही है। वास्तव में कांग्रेस  सरकार कुछ भी करने में विश्वास नहीं करती थी।  हमारी सीमा के  अंदर घुस कर देश के जवानों के सर काट कर उन्होंने सीमा पर फेंक दिए , विदेश मंत्री ने कहा हमें संयम से काम लेना चाहिए। चीन की फ़ौज हमारी सीमा  तक घुस आई , लेकिन हमारे विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने इसे कोई बड़ी बात नहीं माना।

हमें हमारी शक्ति का परिचय करवाया - मोदी ने।  पहले जब पाकिस्तान से आये  हुए पाकिस्तान के डेलीगेसन ने  सरकार की चेतावनी  को अनसुना देते हुए अलगाव वादी हुर्रियत नेताओं से बात चीत की , तो मोदी ने   बिना किसी वार्ता के उन्हें लौटा दिया।   नवाज शरीफ ने युएन ओ में भारत  के खिलाफ झूठ का पिटारा खोला तो मोदी ने पूरे विश्व के सामने  उसे सलाह दे दी की बातचीत करनी है तो पहले  अपनी आतंकवादी गतिविधियाँ बंद करो।

असली उत्तर पाकिस्तान  को मिला दो दिन पहले -  जब प्रधानमंत्री मोदी ने देश की फ़ौज को पूरा अधिकार दे दिया कि ईंट का जवाब पत्थर से दो।   पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में भारतीय सेना ने जो जबरदस्त जवाबी  हमला बोला ,  पाकिस्तान की सेना उलटी भाग खड़ी  हुई।  दो दिन की पूरी शांति बाद पाकिस्तान सही रास्ते पर आ  गया है ; भारत से बातचीत की फरियाद कर रहा है । सच है लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं।

सचमुच मोदी ने देश की जनता और सेना को अपनी स्वयं की ताकत से पुनः मिलवा दिया है।